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दिवाली खुशियों वाली

दिवाली खुशियों वाली

इस अभियान का उद्देश्य है हमारी अपनी प्राचीन संस्कृति में समाहित मिट्टी के बर्तनों के उपयोग को फिर से चलन में लाना, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों का संरक्षण हो सके और इसके साथ ही कुम्हारी परम्परा भी बनी रहे। इस अभियान के माध्यम से मिट्टी के बर्तनों का उपयोग अधिक से अधिक करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसका आरम्भ मिट्टी के दीपक के माध्यम से किया गया है। इस अभियान के एक मायने यह भी हैं कि दिवाली पर मिट्टी के दीपक का उपयोग अधिक से अधिक हो, इससे कुम्हारों को अधिक से अधिक काम मिलेगा। उनकी आने वाली पीढिय़ां भी यही काम करने से कतई नहीं हिचकिचाएंगी। हम लोगों से दीपक दान (दीपक का पैसा) लेंगे और उन पैसों से दीपक खरीद कर इच्छुक(जरूरतमंद ) को मुफ्त में देंगे। वह व्यक्ति उन दीपकों को बेचेगा, जिससे उसकी दिवाली भी खुशियों वाली हो सकेगी। इसलिए इस अभियान का नाम “दिवाली खुशियों वाली ” रखा है। इस अभियान में केवल दीपक ही नहीं, मिट्टी और हाथ से बनी अन्य बहुत सारी वस्तुओं पर काम किया जाएगा, जिससे लोगों का हुनर भी सामने आएगा और रोजगार मिलेगा। वर्ष 2019 की दिवाली से इस अभियान की राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली में शुरुआत हो चुकी है। बीती दिवाली कुल तीन लाख दीपक देश भर में इस अभियान के तहत जलाए गए। हजारों लोग इस अभियान का हिस्सा बने। सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाएं इस अभियान से जुड़ीं। बहुत सारे इच्छुक और कुम्हार सच में अपनी दिवाली खुशियों वाली मना पाए। इसके साथ ही प्रदूषण कम करने में आंशिक तौर पर ही सही, सफलता तो मिली।

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